WHO की नई चेतावनी: कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली से बचाई जा सकती हैं लाखों जिंदगियां
नई दिल्ली/जिनेवा: दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बार फिर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते कैंसर की पहचान हो जाए और मरीज को उचित इलाज मिल जाए तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है। WHO ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, तंबाकू और शराब का सेवन, प्रदूषण, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खान-पान के कारण युवाओं में भी कैंसर के मामले बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच ही इस गंभीर बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार है।
कैंसर क्यों बनता जा रहा है वैश्विक चुनौती?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर आज दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है।
हर वर्ष करोड़ों नए मरीज सामने आते हैं और लाखों लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हो जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि कैंसर वास्तव में एक नहीं बल्कि 100 से अधिक प्रकार की बीमारियों का समूह है, जिसमें शरीर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकती हैं।
यदि शुरुआती अवस्था में इसका पता चल जाए तो अधिकांश प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है।
समय पर जांच क्यों है सबसे जरूरी?
डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर का सबसे बड़ा खतरा यही है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण कई बार बहुत सामान्य होते हैं।
इसी कारण लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
जब तक बीमारी का पता चलता है तब तक कई मामलों में कैंसर शरीर में फैल चुका होता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार निम्नलिखित लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए—
बिना कारण तेजी से वजन घटना।
लगातार थकान महसूस होना।
शरीर में गांठ बनना।
लंबे समय तक खांसी या आवाज बैठना।
मल या मूत्र में खून आना।
लगातार दर्द रहना।
घाव का लंबे समय तक न भरना।
निगलने में कठिनाई।
त्वचा पर असामान्य बदलाव।
हालांकि ये लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन इनकी जांच जरूर करानी चाहिए।
कौन-कौन से कैंसर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं?
भारत सहित दुनिया के कई देशों में कुछ प्रकार के कैंसर सबसे अधिक देखने को मिलते हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
स्तन कैंसर
फेफड़ों का कैंसर
मुंह का कैंसर
गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर
बड़ी आंत का कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर
लीवर कैंसर
भारत में तंबाकू के सेवन के कारण मुंह और गले के कैंसर के मामले अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं।
जीवनशैली का कितना असर?
WHO का कहना है कि कई प्रकार के कैंसर का संबंध सीधे जीवनशैली से जुड़ा हुआ है।
इनमें प्रमुख जोखिम कारक हैं—
धूम्रपान
तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन
अत्यधिक शराब
मोटापा
शारीरिक निष्क्रियता
असंतुलित भोजन
प्रदूषण
संक्रमण के कुछ प्रकार
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन जोखिम कारकों पर नियंत्रण किया जाए तो कैंसर के लाखों मामलों को रोका जा सकता है।
धूम्रपान सबसे बड़ा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तंबाकू आज भी कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन मुंह, गले, फेफड़े और कई अन्य प्रकार के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ने के बाद भी शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगता है, इसलिए जितनी जल्दी इसकी आदत छोड़ी जाए उतना बेहतर है।
स्वस्थ भोजन भी जरूरी
विशेषज्ञ संतुलित आहार को कैंसर से बचाव का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं।
वे सलाह देते हैं कि भोजन में शामिल करें—
ताजे फल
हरी सब्जियां
साबुत अनाज
दालें
मेवे
पर्याप्त पानी
वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, अधिक चीनी, अत्यधिक नमक और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखने की सलाह दी जाती है।
नियमित व्यायाम से भी मिलता है लाभ
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करना कई गंभीर बीमारियों के साथ-साथ कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम कर सकता है।
नियमित पैदल चलना, योग, साइकिल चलाना या हल्का व्यायाम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है।
स्क्रीनिंग से बच सकती हैं लाखों जानें
डॉक्टरों का कहना है कि कुछ प्रकार के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग बेहद प्रभावी साबित होती है।
जैसे—
स्तन कैंसर की जांच।
सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग।
बड़ी आंत के कैंसर की जांच।
प्रोस्टेट संबंधी जांच (उचित आयु में)।
इन जांचों के माध्यम से बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है।
टीकाकरण की भी अहम भूमिका
विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ प्रकार के कैंसर संक्रमण से जुड़े होते हैं।
उदाहरण के लिए—
HPV संक्रमण से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
हेपेटाइटिस-बी संक्रमण लीवर कैंसर से जुड़ा माना जाता है।
ऐसे मामलों में उपलब्ध टीके भविष्य में कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
भारत में बढ़ रही जागरूकता
पिछले कुछ वर्षों में भारत में कैंसर को लेकर जागरूकता अभियान तेज हुए हैं।
सरकारी और निजी अस्पताल नियमित जांच शिविर आयोजित कर रहे हैं।
इसके अलावा डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म और स्वास्थ्य अभियान भी लोगों को समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि—
तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
शराब का सेवन सीमित करें।
नियमित व्यायाम करें।
संतुलित भोजन लें।
वजन नियंत्रित रखें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा चेतावनी यह याद दिलाती है कि कैंसर आज पूरी दुनिया के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। हालांकि अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित स्क्रीनिंग और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की मदद से बड़ी संख्या में कैंसर के मामलों का सफल इलाज संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। यदि लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, जोखिम कारकों से बचें और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें, तो कैंसर से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराना न केवल कैंसर बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचाव का प्रभावी तरीका माना जाता है।

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